सूर्य नमस्कार कैसे किया जाता हैं?

सूर्य नमस्कार-

सूर्य देव को नमस्कार। सूर्य देव को अच्छे स्वास्थ्य और लंबी आयु देने वाले भगवान माने जाते हैं। प्राचीन समय मे सूर्य नमस्कार दिनचर्या का एक हिस्सा था। और आध्यात्मिक जीवन का भी अंग था। सूर्य नमस्कार योगासन और प्राणायाम का सयोगः हैं, यह प्रारम्भिक अभ्यास और योगासन के बीच किया जाता हैं। सूर्य नमस्कार करने से शरीर मे लचक आती हैं जिससे प्राणायाम और योगासन करने में मदद मिलती हैं। 

सूर्य नमस्कार करने के बाद, आसनों को करने में आसानी होती हैं, कड़े शरीर वाले व्यक्तियों के लिए सूर्य नमस्कार एक वरदान हैं। जिससे वह अपने शरीर मे दोबारा लचक पा सकते हैं। नियम के अनुसार सूर्य नमस्कार सूर्योदय या सुर्यास्त के समय किया जाता हैं। सूर्य नमस्कार करने के लिए मुख्य चरण जानना बहुत जरूरी हैं।

सूर्य नमस्कार के चरण-

1. प्रणामआसन। (Pranamasana) सूर्य देव की और मुख करके खड़े हो जाए। पैरों की एड़ियां जुड़ीं हुई होना एवं पंजे खुले हुए हो, दोनो हाथ प्रणाम की स्थिति में करें।

(Surya Namaskar 1)

 

2. हस्तउत्तानासन। (Hastauttanasana) अब श्वास लेते हुए दोनों हाथों को इसी स्थिति में ही ऊपर की तरफ ले जाएं एव शरीर को पीछे की और झुकाएं।

(Surya Namaskar 2)

3. हस्तपादासन। (Hasto Padasana) श्वास छोड़ते हुए आगे की तरफ झुकें, एवं दोनों हाथों को नीचे जमीन पर रखें या अपने पैरो को छुएँ, माथे से अपने घुटनों को छुएँ।

(Surya Namaskar 3)


4. अश्वसंचालसन। (Ashwa Sanchalanasana) अब हथेलियों को जमीन पर जमा कर रखें एवं पांव को हाथों की दोनों छोटी उंगलियों के पास रखें, अब  बाएं पैर को पीछे की तरफ ले जाएं औऱ पूरी तरह से पैर सीधा करें अब श्वास खिंचे ओर ऊपर की तरफ देखें।

(Surya Namaskar 4)


5. दंडासन। (Dandasana) ज़मीन पर रखें हाथों को स्थिर रखें एवं अब दायाँ पैर भी पीछे की तरफ ले जायें, अब हाथों ओर पैरो के बल पर स्वयं को रखें, सर से लेकर पाँव तक शरीर को एक रेखा में रखें, जमीन से 30° जुकाव पर शरीर को रखें। 

(Surya Namaskar 5)

6. अष्टांगासन। (Ashtanga Namaskara) अब श्वास छोड़ते हुए, शरीर को आगे की तरफ ले जाएं एवं माथे को जमीन पर टिकाएं, याद रहें हाथ एवं पैरो की स्थिति को स्थिर रहने दें, श्वास छोड़े ओर लें, अब जमीन पर घुटनों को टिकाएं, अपने कूल्हे ऊपर की तरफ हल्का सा उठा हुआ रहने दे, छाती को जमीन पर टिकाएं और सामने देंखें, पेट जमीन पर टिका हुआ नही होना चाहिए, अब श्वास पूरी तरह छोड़ दें।

(Surya Namaskar 6)

7. भुजंगासन। (Bhujangasana) अब अपनी हथेलियों के बल पर शरीर को उठाये एवं ऊपर की और देखें, याद रहें हाथ व पैरो की स्थिति में कोई बदलाव नही होना चाहिए, एवं श्वास लें।

(Surya Namaskar 7)

8. पर्वतआसन। (Parvatasana) अब अपने सिर को निचे की ओर झुकाएं, कुल्हे ऊपर की ओर उठे हुए होना चाहिए, अब पिछे की ओर अपने पैरो के पंजो को देखें, गुठने पूरी तरह सीधे हो, यह स्थिति त्रिकोण के समान हो, अब श्वास ले ओर छोड़ें। 

(Surya Namaskar 8)

9. अश्वसंचालॉसन। (Ashwa Sanchalanasana) अब गुठनों को पूरी तरह जमीन पर टिकाएं, श्वास लेते हुए, बायां पैर आगे हाथों की रेखा में लाएं, ओर दायाँ पैर पीछे की तरफ सीधी रेखा में हों घुटना जमीन से उठा हुआ हो, अब आगे की तरफ देखें।

(Surya Namaskar 9)


10. हस्तपादासन। (Hasta Padasana) अब श्वास लेते हुए अपने दाएं पैर को भी हाथों की रेखा में लाएं, अब कमर को ऊपर की ओर रखें, हाथो से पैरों को छुएँ, श्वास छोड़ते हुए सिर से घुटनों को छुएँ।

(Surya Namaskar 10)

11. हस्तउत्तानासन। (Hastauttanasana) अब श्वास लेते हुए दोनों हाथों को इसी स्थिति में ही ऊपर की तरफ ले जाएं एव शरीर को पीछे की और झुकाएं।

(Surya Namaskar 11)

12. प्रणामआसन। (Pranamasana) अब दोनों हाथों को प्रणाम की स्थिति में करते हुए, सीधे खड़ें हो जाएँ, पैर खुले हुए और एड़ियां जुड़ी हो, सामने की तरफ देखें, श्वास ले और छोड़ें।

(Surya Namaskar 12)

सूर्य नमस्कार- (Surya Namaskar)

यह सूर्य नमस्कार  के 12 चरण हैं, अब अपने आप को सामान्य अवस्था मे ले आएं, अधिकतम आप सुर्य नमस्कार 12 बार दोहरा सकते हैं, सुर्य नमस्कार करने से शरीर को स्वास्थ्य संबंधित अनेक लाभ होते हैं, शरीर निरोगी बनता हैं, मन स्वस्थ और मस्तिष्क तेज होता हैं।

सूर्य नमस्कार करने के अनेक शरीरिक लाभ होते हैं, जैसे- पेट की चर्बी कम होती हैं, रीढ़ की हड्डी में लचक उत्पन्न होती हैं, श्वास लेने की क्षमता में व्रद्धि होती हैं, यह लीग्मेंट को मजबूत करता हैं और रीढ़ वाले हिस्से को कई लाभ देता हैं, मस्तिष्क की मांसपेशियों में स्फूर्ति प्रदान करता हैं, सूर्य नमस्कार करने से रक्त का संचालन अधिक होता है और पाचन क्रिया जो मजबूती प्रदान करता हैं।

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