सूर्य नमस्कार के चरण।

सूर्यनमस्कार-

सूर्यनमस्कार का शाब्दिक अर्थ है सूर्य को अर्पण करना।  आज हम आपको बताने वाले हैं, सूर्य नमस्कार कितने प्रकार के होते हैं और उनको करने से क्या क्या फ़ायदे है।

सूर्य नमस्कार 12 मुद्राओ में किया जाने वाला एक योग हैं। इसके अभ्यास से शरीर निरोग होता हैं। इन मुद्राओं में शरीर को कमर से आगे और पीछे की और स्ट्रेच किया जाता हैं। इससे शरीर मे पूर्ण तरीके से आक्सीजन का संचार होता हैं, और रक्त प्रवाह अच्छा होता हैं। रक्त दाब को सामान्य करने में सूर्य नमस्कार काफी लाभदायक होता हैं, वजन कम करने में सूर्यनमस्कार काफी कारगर होता हैं।

 

 
(Surya Namaskar)

 

सूर्यनमस्कार करने से शरीर को कई रोगों से छुटकारा भी मिलता हैं।
 
  1. प्रणामआसन। (Pranamasana)
  2. हस्तउत्तानासन। (Hastauttanasana)
  3. हस्तपादासन। (Hasto Padasana)
  4. अश्वसंचालसन। (Ashwa Sanchalanasana)
  5. दंडासन। (Dandasana)
  6. अष्टांगासन। (Ashtanga Namaskara) 
  7. भुजंगासन। (Bhujangasana) 
  8. पर्वतआसन। (Parvatasana)
  9. अश्वसंचालॉसन। (Ashwa Sanchalanasana)
  10. हस्तपादासन। (Hasta Padasana)
  11. हस्तउत्तानासन। (Hastauttanasana)
  12. प्रणामआसन। (Pranamasana)
 
सूर्यनमस्कार के इन 12 आसन के नियमित अभ्यास से शरीर के विभिन्न अंगों को लाभ मिलता हैं, यह योग आसान ह्रदय, आँत, पेट, छाती, गला, पैर औरशरीर के सभी अंगों पर गहरा प्रभाव डालता हैं। यह सूर्यनमस्कार रक्त को शुद्ध करता हैं एवं शरीर में रक्त का सही संचार करता हैं। और साथ ही पेट की पाचन शक्ति मजबूत करता हैं। सूर्यनमस्कार शरीर के मूलभूत तत्वों के संतुलन अर्थात वात-पित्त-कफ के संतुलन में भी सहयोग करता हैं।
 
(Surya Namaskar)

Leave a Comment

error

Enjoy this blog? Please spread the word :)