एकपाद शीर्षासन करने की विधि एवं लाभ बताइए?

एक पाद शीर्षासन-

इस आसन में एक पैर ज़मीन पर और एक पैर ऊपर उठाकर शीर्षासन किया जाता हैं। व इसे एकपाद शीर्षासन कहते हैं। रोग प्रतिरोध शक्ति को बढाता है एकपाद सिरसासन एकपाद सिरसासन विभिन्न विधियों से किया जाता है। बैठकर, खडे़ होकर दोनों तरह से किए जाने वाले इस आसन से अलग-अलग रोग ठीक होते हैं। इस आसन में एक पैर को उठाकर सिर के उपर ले जाया जाता है। यह आसन मोटापा दूर करने के लिए उत्तम योग आसन है।

एकपाद शीर्षासन करने की विधि-

यह विधि शीर्षासन से सरल हैं। इसमें फ़र्क सिर्फ इतना हैं कि शीर्षासन में दोनों पैर ऊर्ध्व की तरफ किये जाते हैं और संतुलन की तरफ ध्यान देना होता हैं। पर एक पाद शीर्षासन में एक पैर ज़मीन पर ही टिकाना होता हैं। एव इस आसन को एकपाद आलंबीत शीर्षासन भी कहते हैं।

वज्रासन में बैठ जाएं, सिर को सामने की तरफ झुकाते हुए कंबल पर सिर के अग्र भाग का ऊपरी तल टीकाएँ। दोनों हाथों की अगुलियों को एक-दूसरे में फंसाकर सिर के समीप घेरा बनाते हुए रखें, अब क्रमशः सिर की तरफ वज़न देते हुए कमर को उठाएँ। (इस अवस्था मे शरीर का आधा वजन सिर पर एवं आधा वजन पैरो की तरफ हो जाएगा) इसी क्रम में अब पूरा संतुलन बनाते हुए शरीर का पूरा भार सिर के अग्र भाग पर रखने की कोशिश करते हुए दोनों घुटनों को ऊपर उठाएं। 

ekapaad sheershaasan karane kee vidhi evan laabh bataiye

धीरे धीरे एक पैर को सीधे आकाश की तरफ तान दें व दूसरा पैर भी संतुलन बनाते हुए ऊपर की तरफ़ करें। यह अवस्था शीर्षासन कहलाती हैं। यदि आप अकेले नहीं कर सकते तो कुछ दिन किसी की मदद या दीवार के समीप जाकर अभ्यास करें। अनुकूलतानुसार कुछ देर रुकें। मूल स्थिति में आते समय वापस घुटनों को मोडें, क़मर के हिस्से को झुकाएं एव वापस पैरों को ज़मीन पर रखें। पुर्ण आसन की स्थिति में श्वास लेकर कुंभक करें एवं वापस आते समय भी कुम्भक करें। (इस आसन को शरीर का भार माथे की तरफ़ रखते हुए करते हैं। सिर के बिल्कुल बीच के भाग मे नही रखते अतः आप शीर्षसन ध्यान पूर्वक करें।

ध्यान – स्वभाविक श्वास में ध्यान लगाएं।

अगर आप नई सुरवात कर रहे है या पहले आप ने कभी नहीं किया हैं, तो आप सिर के नीचे कंबल की मोटी तह कर लें, क्योंकि शीर्षसन में पूरे शरीर का वजन/भार सिर पर पड़ता हैं।

एक पाद शीर्षासन करने से लाभ-

  1. शीर्षासन को भी आसनों का राजा कहा गया हैं। यह आसन शरीर का कायाकल्प करता हैं।
  2. प्रतिदिन अभ्यास के कारण मस्तिष्क की शिराओं में स्वस्थ एवं शुद्ध रक्त प्रवाहित होने लगता हैं जिसके कारण मानसिक दुर्बलता एवं मस्तिष्क संबंधित रोग धीरे धीरे क्षीण होने लगते हैं। 
  3. यह आसन ओज, तेज और चेहरे की चमक बढ़ाता हैं।
  4. इस आसन के अभ्यास से रक्त शुद्ध होता हैं, एवं बालों का असमय पकना, बालों का झड़ना एवं त्वचा संबंधी रोगों का शमन होता हैं।
  5. यौवन देता हुआ चेहरे की झुर्रियों को समाप्त करता हैं।
  6. नेत्र संबंधित दोष दूर होते हैं। नेत्रों को सुन्दर बनाता हैं।
  7. इस आसन से व्यक्ति का जीवन उत्साह और स्फूर्ति से भर जाता हैं।
  8. समस्त प्रकार के वायु विकार का नाश करता है।
  9. उन्माद व मिर्गी के लिए भी यह आसन उचित हैं, व चंचल मन को संतुलन प्रदान करता हैं।
  10. लकवा (पक्षाघात) से पीड़ित व्यक्ति उचित देख-रेख में एवं क्रम पूर्वक नियमित करें।
  11. दमा व क्षय रोगों को नियमित अभ्यास से दूर किया जा सकता हैं।
  12. काम विकार का शमन कर यह कामशक्ति यथावत करता हैं।
  13. उदर-प्रदेश एवं प्रजनन संस्थान की उचित देखभाल करता हैं।
  14. समस्त मानसिक विकारों में यथासंभव लाभ मिलता हैं।

एकपाद शीर्षासन करते समय सावधानियां-

  • नए लोग यदि शीर्षासन करना चाहते हैं, उन्होंने पहले नहीं किया तो ध्यान रहे वह अकेले ना करें। 
  • दीवार के सहारे या अन्य व्यक्ति की सहायता लें।
  • यदि दीवार का सहारा लें तो दीवार से 2 या 3 इंच की दूरी पर करें अन्यथा इसका उल्टा असर पेट या पीठ पर पड़ेगा।
  • जल्दबाजी ना करें वरना गर्दन या पीठ में दर्द हो जाएगा।
  • इस आसन में शरीर पूरा सीधा रखें, ताकि वह स्थिरता और दृढ़ता पा सके।
  • दोनों पैर आकाश की तरफ़ लंबवत समांतर होने चाहिए।
  • नए अभ्यर्थियों शुरुआत में 1 से 2 मिनट के लिए ही करें।
  • अभ्यास हो जाने पर दोनों पैर हल्के झटके के साथ सीधे ऊपर की तरफ तान दें।
  • शीर्षासन के पहले सर्वागासन का अभ्यास जरूर करें।
  • शीर्षासन के बाद ताड़ासन व शवासन अवश्य करें।
  • उच्च रक्तचाप व निम्न रक्तचाप वाले व्यक्ति इन आसनों से शुरुआत में परहेज करें।
  • ह्रदय रोग, चक्कर आना, सिर घूमना आदि बीमारियों वाले व्यक्ति भी शीर्षासन को ना करें।

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