सर्वांगासन करने की विधि एवं सर्वांगासन के लाभ बताइए।

सर्वांगासन (Sarvangasana) 

सर्वांगासन का शाब्दिक अर्थ सर्व का अर्थ पूरा पूर्ण या सभी है और अंग का अर्थ शरीर का भाग हैं चूँकि इस आसन में सभी अंग से योग क्रियाएं हो जाती हैं, और पूरा शरीर लाभाविन्त होता हैं इसलिए इस आसन का नाम सर्वांगासन हैं। हम जानेंगे ‘सर्वांगासन’ कैसे किया जाता हैं विधि? ‘सर्वांगासन के लाभ’ योग करने से अनेक शारिरिक लाभ होते हैं। वैसे इस आसन को शीर्षासन के पश्चात सबसे महत्वपूर्ण माना गया हैं। इस आसन को आसनों का राजा भी कहा जाता हैं।

सर्वांगासन रक्त संचार को शुद्ध व पुष्ट करने तथा गंदे खून की नालियों (शिराओं) को साफ करने के लिए विशेष लाभकारी है। हम लोग सारा दिन या तो खड़े रहते हैं या फिर बैठे रहते हैं। हमारा हृदय (जो छाती के बायीं ओर स्थित है) शरीर को पुष्ट करने के लिए रक्त को सारे शरीर में धमनियों द्वारा पहुंचाता है।

जब रक्त हृदय से चलता है, तो इसमें ऑक्सीजन की मात्रा ज्यादा होती है इसलिए वह रगों में तेजी से दौड़ता है और शरीर के हर अंग तक आसानी से पहुंच जाता है, लेकिन जब उसे शरीर का विकार इकट्ठा कर शिराओं द्वारा वापस हृदय की ओर आना होता है, तो एक तो क्योंकि उसमें विकार तथा कार्बन का मात्रा अधिक होती है, इसलिए उसकी गति में कमी आ जाती है, दूसरे उसे क्योंकि ऊपर की ओर आना होता है, इसलिए भी कठिनाई होती है।

Explain the method of doing Sarvangasana and the benefits of Sarvangasana.
(The Benefits of Sarvangasana)


सर्वांगासन योग करने की विधि- (Method of doing Sarvangasana Yoga) 

पीठ के बल लेट जाएँ। दोनों हाथ ज़मीन पर कमर के अगल-बगल में रखें। घुटनों को कड़ा रखते हुए धीरे धीरे दोनों पैरों को ऊपर की और इतना उठाये की कमर और पैर लगभग समकोण बना लें अब अपनी हथेलियों को कमर पर लगाएं और धीरे धीरे कमर को हाथों के सहारे इतना उठाएँ कि आपकी ठुड्डी आपके सीने को छूने लगें। चूँकि आपने अभी हाथों का अवलंबन लिया हैं अतः यह ‘सालंब सर्वांगासन’ कहलाएगा।

अभ्यास हो जाने के बाद हाथों का अवलंबन हटा लें। वह सवांर्गासन कहलाएगा। इस आसन को प्रतिदिन करने से आशातीत लाभ होता हैं।

सर्वांगासन में श्वासक्रम/समय (Respiration / Time in Sarvangasana) 

आसन करते समय और वापस आते समय अंत: कुम्भक करें एवं पूर्ण आसन पर स्वभाविक श्वास चलने दे। आधे से 5 मिनट तक कर सकते हैं। अभ्यास हो जाने पर समय बढ़ाएँ।

ध्यान: शस्त्रार चक्र छोड़कर सम्पूर्ण कुंडलिनी का ध्यान करें। विशेष रूप से विशुद्धि चक्र पर।

सर्वांगासन से लाभ- (Benefits of  Sarvangasana) 

  1. रक्त शुद्धि, मस्तिष्क एवं फेफड़ों की पुष्टि के लिए बहुत उपयोगी है।
  2. इसके करने से रक्त प्रवाह मस्तिष्क की ओर हो जाता है।
  3. यह टांसिल व गले के रोगों की रामबाण दवा है, नेत्र ज्योति को बढाता है, वात रोग तथा रक्त विकार को दूर करता है।
  4. सिर दर्द, रक्त पित्त तथा पांडु रोगों को शांत करता है।
  5. इस आसन से रक्त संचार तेज होता है, यह यौवन प्रदान करता है।
  6. डायफ्राम का मस्तिष्क की ओर खिंचाव होने से सभी पाचन यंत्र सक्रिय बनते हैं।
  7. यह त्वचा रोगों को ठीक करता है।
  8. यदि हम इसे “काया कल्पासन” कहें, तो अतिशयोक्ति नहीं होगी। मूल रूप से इस आसन का प्रभाव थायराइड ग्रन्थि, मेरुदंड, ह्रदय एवं पैरो से सम्बंधित सभी रोगों पर पड़ता हैं।
  9. आसन करने पर रक्त की मात्रा बढ़ जाने से ग्रन्थि की कार्यक्षमता बढ़ जाती हैं, जिससे स्वास्थ्य पर अच्छा प्रभाव पड़ता हैं।
  10. जिनकी बुद्धि हमेशा भृमित रहती है, काम करने में मन नहीं लगता; उनको यह आसन लगभग 6 महीने तक काम से कम 3 से 5 मिनट तक अवश्य करना चाहिए।
  11. मिर्गी रोग और कमजोर मस्तिष्क वालों के लिए यह आसन अत्यंत लाभकारी हैं।
  12. स्त्रियां क्रमशः इस अभ्यास को कई रोगों से छुटकारा पा सकती हैं। 
  13. वायु गोला टल जाने पर इस आसन को एक ही समय मे चार से छह बार अवश्य करना चाहिए।
  14. यह आसन पूर्णयौवन देता है।
  15. बालों का झड़ना रोकता हैं, चेहरे को साफ, चमकदार व तेजोमय बनाता है।
  16. कामशक्ति को व्यवस्थित कर काम विकार का शमन करता हैं।
  17. नेत्र-ज्योति, निम्न रक्तचाप, पाचन-संस्थान, रक्त-विकार व प्रमेह आदि रोगों के लिए यह नितांत उपयोगी हैं।
  18. शीर्षासन से मिलने वाले लाभ भी इस आसन से मिल जाते हैं।
  19. इस आसन को नियमित करने से सम्पूर्ण शरीर स्वस्थ रहता हैं।

Explain the method of doing Sarvangasana and the benefits of Sarvangasana.
(The Benefits of Sarvangasana)

सर्वांगासन करते समय सावधानियाँ- (Precautions while Sarvangasan) 


  • उच्च रक्तचाप ह्रदय संबंधित बीमारी वाले साधक किसी योग्य गुरु के निर्देशन में करें।
  • सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस, स्लिप एवं यकृत के विकार वाले इस आसन को न करें।
  • पदम सर्वांगासन लगाने के लिए सर्वांगासन की अंतिम स्थिति में पहुंचकर पदमासन लगाएँ, या पहले पदमासन लगाएं फिर सर्वांगासन की स्थिति में पहुंच जाएं तो वह पदम सर्वांगासन कहलाएगा। ‘एक पाद सर्वांगासन’ के लिए एक पैर को कमर से मोड़कर सामने सिर की तरफ ज़मीन से स्पर्श कराएँ, यह स्थिति एक पाद सर्वांगासन योग कहलाएगी।

 

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