हलासन कैसे किया जाता हैं?

हलासन योग- (Halasan Yoga)

शाब्दिक अर्थ: हल का अर्थ है लांगल। खेतों में उपयोग किया जाने वाले एक औजार का नाम हल यानी जमीन को जोतने वाला एक कृषि यंत्र और आसन का अर्थ मुद्रा यानी शारीरिक अवस्था से है। इस आसन को करते हुए शरीर का आकार हल की तरह दिखाई देता है, इसलिए इसे हलासन नाम दिया गया है।

अंग्रेजी में इस आसन का नाम ‘प्लो पोज’ है। वजन को नियंत्रित रखना हो या कमर को मजबूती देनी हो, तो यह आसन लाभकारी हो सकता है। इतना ही नहीं, हलासन के जरिए कई स्वास्थ्य लाभ उठाए जा सकते हैं, जिनके बारे में लेख में आगे विस्तार से बताया गया है। चलिए हम जानेंगे कि हलासन कैसे किया जाता हैं? यह आसन सर्वांगासन का ही एक रूप हैं।

हलासन कैसे किया जाता हैं? विधि-

शवासन की स्थिति में लेट जाएं। पैरों को समान्तर उठाये व सर्वांगासन की स्थिति से होते हुए पैरों को पिछे की ओर (सिर कि तरफ) ले जाएं। पैर के पंजो को जमीन पर स्पर्श कराएं ध्यान रहे इस स्थिति में पैरों को लंबवत ही मोड़कर जमीन पर स्पर्श करना हैं, इस स्थिति में जालधंर बंध अपने आप लग जाता हैं। हाथों की स्थिति दो प्रकार से कर सकते हैं।

पहली स्थिति मे हाथ जमीन पर या नितम्ब के नीचे रहने दें। दूसरी स्थिति में अपने हाथों से पैरों के पंजों को स्पर्श करें। लगभग 10 से 15 सेकेंड की स्थिति के बाद धीरे धीरे वापस शवासन की स्थिति में आ जाएं।

halaasan kaise kiya jaata hain
(Halaasan Yoga)

हलासन में श्वासक्रम/समय-

पूर्ण स्थिति में जाते समय श्वास अन्दर रोकें एवं पूर्ण स्थिति बन जाने के बाद धीरे धीरे श्वास प्रश्वास करें व मूल शतक स्थिति में वापिस आते समय अंत कुंभक करें। तत्त्पश्चात श्वास छोड़ें अभ्यास हो जाने पर 5-7 मिनट तक हलासन की स्थिति में ही रहें।

ध्यान- विशुद्धि चक्र पर।

हलासन योग करने से लाभ-

  • यह आसन भी यौवन प्रदान करता हैं।
  • रीढ़ की हड्डी एवं कमर को बुढ़ापे तक झुकने नही देता हैं।
  • ह्रदय एवं पीठ को बल प्रदान करता हैं।
  • रक्त का पूर्ण संचार कर रक्त को शुद्धि देता हुआ जठराग्नि को उद्दीप्त करता है।
  • यौन शक्ति को यथावत रखता हुआ यौन-विकार का नाश करता हैं।
  • चेहरे का निखार बढ़ाता हैं।
  • यह आसन सूक्ष्म तंत्रिका-तंत्र को सशक्त बनाता हैं।
  • इस आसन से आलस्य दूर हो जाता हैं।
  • कार्य करने की क्षमता बढ़ती हैं।
  • पृष्ठ भाग की पीड़ा को शांत करता हैं। मन प्रसन्न करता हैं।
  • ग्रीवा संबधी रोगों को दूर करता हैं।
  • गर्भाशय को मजबूती प्रदान करता हैं।
  • कब्ज नाशक हैं।
  • अग्नाशय के उद्दीप्त होने के कारण इन्सुलिन की मात्रा में व्रद्धि होने लगती हैं अतः मधुमेह के रोगियों को लाभ होता हैं।
  • थायराइड में लाभ प्राप्त होता हैं।
  • किडनी को सुचारू करता हैं। मोटापे को दूर करता हैं, एवं छोटी आंत व बड़ी आंत को क्रियाशील बनाता हैं।
  • हलासन के अभ्यास आंतो को स्वस्थ रखा जा सकता है।
  • इस आसन को करने से किडनी संबंधित समस्या को रोका जा सकता है।
  • इस आसन को करने से शरीर की पैंक्रियास में लाभ पहुंचाता है।
  • पाचन की समस्या जैसे – गैस, एसिडिटी, अपचन और कब्ज आदि समस्याओं में लाभकारी होता है।
  • इस आसन को करने से महिलाओ के मानसिक धर्म के समय होने वाली समस्या को दूर किया जा सकता है।
  • इस आसन को करने पर शरीर का ब्लड सरकुलेशन ठीक रहता है।
  • इस आसन निरंतर अभ्यास से पेट की चर्बी और मोटाप में लाभकारी होता है।
  • रीड की हड्डी और गर्दन को लचीला बनाता है।
  • इस आसन को करने पर दमा तथा अस्थमा में लाभ पहुंचाता है।
  • इस आसन को करने पर रक्त का प्रभाव सर की तरफ जाता है जिससे चेहरे तथा बालों को स्वस्थ और चमकदार बनाता है।
  • तनाव और एकाग्रता में भी लाभकारी होता है।
  • मधुमेह और थायराइड को होने से रोकता है

हलासन करते समय सावधानियां-

  1. कड़क शरीर वाले या रीढ़ की हड्डी में चोंट वाले व्यक्ति इस आसन को उचित देख-रेख में करें।
  2. साइटिका, स्लिप डिस्क, हार्निया, अति उच्च रक्तचाप वाले रोगी इस आसन को न करें।
  3. हलासन को हाई ब्लड प्रेशर वाले लोगों को नहीं करना चाहिए।
  4. जिन लोगों को स्लिप डिस्क या कमर में किसी प्रकार का गंभीर दर्द या समस्या है तो इस आसन को नहीं किया जाना चाहिए।
  5. इस आसन को वह लोग ना करें जिन को हर्निया की समस्या है।
  6. यदि पेट में या गर्दन में किसी प्रकार का की समस्या हो तो उन लोगों को नहीं करना चाहिए।
  7. इस आसन को करते समय किसी प्रकार की समस्या होने पर किसी डॉक्टर या योग गुरु की सहायता जरूरी लेना चाहिए।
नोट-
  1. हलासन की स्थिति में जब हाथों को पैरों की तरफ ले जाकर हथेलियों से पैरों के पंजों को पकड़ा जाता हैं। तब कुछ योगाचार्य उस स्थिति को पूर्वोत्तानासन भी कहते हैं।
  2. कुछ योग शिक्षक हलासन में पैरों के पंजे की स्थिति बदलवाकर करवाते हैं।
  3. यदि पैरों को सिर्फ 90°डीग्री पर उठाते हैं तो वह ‘अर्ध हलासन’ कहलाता हैं। (आयुष मंत्रालय द्वारा जारी 21 जून 2018)

“योग का प्रारंभ यम नियम के साथ करने पर साधकगण अधिक लाभाविन्त होते हैं।”


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