हनुमानासन करने की विधि बताइए?

हनुमानासन योग-

हनुमान श्रीराम के परम भक्त थे और अत्यंत बलशाली और शक्तिशाली थे। भक्ति, नम्रता और शारीरिक बल के साथ संकल्प का योग हनुमान में था। हनुमानासन के अभ्यास से ये समस्त शक्तियां उतपन्न होती हैं। हनुमानासन करने की विधि एवं हनुमानासन के लाभ बताइए, इस लेख में हनुमानासन करने के तरीके व उससे होने वाले लाभों के बारे में बताया गया है। हनुमानासन करने की विधि एवं हनुमानासन के लाभ साथ ही लेख में यह भी बतायाा गया है कि हनुमानासन के दौरान क्या सावधानी बरतनी चाहिए। हनुमानासन करने की विधि एवं हनुमानासन के लाभ बताइए। 

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 (हनुमानासन योग)

हनुमानासन योग की विधि बताइए?

हनुमानासन करने की विधि- आप सबसे पहले दोनों घुटनों के बल बैठ जाएं या एक घुटने को जमीन पर टेकें और दूसरे पैर को उसके बग़ल में रखें। अब दोनों हाथों की हथेलियों को शरीर के अगल-बगल की ज़मीन पर रखें। धीरे-धीरे दोनों पैरों को आगे-पीछे फैलाएँ। हाथों का सहारा लें (जल्दबाजी ना करें क्योंकि जांघों, पिंडलियों एवं गुदाद्वार के पास अधिक तनाव होता हैं अतः क्रिया को पूर्ण करने में नए व्यक्ति को कुछ दिन लग सकते हैं अतः आप अपनी क्षमता अनुसार ही यह योग आसन करें) दोंनो पैरों को विपरीत में इतना फैलाए की नितंब, जाँघों व पिंडलि ज़मीन को स्पर्श करने लगे, अब हाथों का सहारा हटाकर छाती के सामने हाथों को लाएं और नमस्कार मुद्रा बनाएँ या दूसरी प्रकार से हाथों को सिर के ऊपर ले जाकर नमस्कार मुद्रा बना सकते हैं।

ध्यान: 10 से 20 सेकंड तक करें। 2 से 3 बार करें।
श्वासक्रम: अंतिम स्थिति में स्वाभाविक श्वांस-प्रश्वास लें।

 

हनुमानासन योग के लाभ बताइए?

  1. काम विकार को शांत करता हैं। जनेन्द्रिय के रोग दूर करता हैं।
  2. पिडलियों, जाँघों और श्रोणि-स्थान में रक्त संचार की क्रिया को बढ़ाकर स्नायुतंत्र को लाभ पहुँचाता हैं।
  3. गठिया रोग को दूर करता हैं।
  4. इस आसन का जब हम लगातार अभ्यास करते हैं, तो हमारी नाभि के निचले हिस्से की हड्डीयां लचीली होती है।
  5. इसको करने से साइटिका का दर्द या नर्वस सिस्टम का दर्द हमेशा के लिए समाप्त हो जाता है। इस आसन को करने से हाथ पैरों के स्नायु भी शक्तिशाली बनते हैं।
  6. इसको करने से हमारी कमर पतली होती है और मांसपेशियां मजबूत होती है।
  7. इस आसन के नियमित अभ्यास से स्त्रियों के सभी रोग जैसे कि मासिक धर्म संबंधी व रक्त स्त्राव दूर हो जाते हैं।
  8. एक इंटेस स्ट्रेच होने के नाते, यह आसन तनाव को मुक्त रखने में मदद करता है।
 
 
नोट: एक हाथ में गदा एव एक हाथ में पर्वत इस प्रकार की मूर्ति के प्रचलन में होने के कारण कोई-कोई योग गुरु हनुमानासन योग को उस प्रकार से भी करवाते हैं। एवं हनुमानासन योग को और भी कई प्रकार से किया जा सकता हैं।
 
 
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(Hanumanasana Yoga)

हनुमानासन योग करते समय सावधानीयाँ-

  1. आसन करने के बाद एकदम से खड़े ना हों, सामने पैर फैलाकर बैठ जाएँ।
  2. स्लिप, डिस्क, साइटिका, हर्निया, और कुल्हों की हड्डियां खिसक जाने की समस्या वाले व्यक्ति इस आसन को बिल्कुल न करें।
  3. अगर इस आसन को करते समय आपके पैरों में दर्द महसूस होता है तो उसी जगह पैरों को रोक लें।
  4. अब पुरानी अवस्था में वापस आ जाएं। फिर से कुछ मिनट बाद उस आसन को दोहराएं।
  5. पैरों को जितना संभव हो उतना ही सीधा करें।
  6. कुछ भी समस्या होने पर योग ट्रेनर की मदद जरूर लें।

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