ग्रीवासन करने की विधि एवं ग्रीवासन करने से लाभ।

ग्रीवासन- (Greevaasan) 

यह आसन शरीर मे लचक और कमर में स्ट्रेच को बढ़ाता हैं यह आसन शरीर में रक्त संचार बढ़ता हैं,  इस आसन से पूर्ण शरीर मे रक्त का प्रवाह अच्छे से होता हैं। आज हम ‘ग्रीवासन करने की विधि’ एवं ‘ग्रीवासन करने से लाभ’ जानने वाले हैं।

ग्रीवासन करने की विधि- (Method of Greevaasan) 

योग अभ्यास करने के लिए सबसे पहले आप अपने योग मेट पर अपने दोनों पैरों को मोड़कर आराम से बैठ जाएं। अब अपनी पीठ को सीधा रखें एवं अपने दोंनो हाथो को अपने घुटनों के ऊपर सीधे करके हाथों की हथेलियों को ऊपर की ओर रखें। अब बहुत आराम से आप अपनी आँखों को बंद करें। अब आप गहरी सांस ले, एवं सांस पूर्णतः बाहर छोड़ें। फिर अपनी साँस को छोड़ते हुए अपनी गर्दन को आगे की ओर झुका लें और कोशिश करे की आप की ठुड्डी आप की छाती के साथ लग जाएं।

सांस को भरते हुए अपनी गर्दन को पीछे की और ले जाएं फिर आकाश की तरफ देखें । इस स्तिथि में अपने कंधों को पीछे की और खीचें और गर्दन के पीछे के भाग में खिचाव को महसूस करवाएं। अब अपनी गर्दन को सीधा कर लें और साथ ही अपनी साँस को भी सामान्य कर लें । इसे आप 5 से 10 बार कर सकते हैं। इस का अभ्यास आप बिल्कुल धीरे -धीरे साँस की सजगता के साथ करें और साँस को छोड़ते हुए गर्दन को आगे झुकाएं और साँस को भरते हुए गर्दन को पीछे की ओर ले जाएं ।

ग्रीवासन के लाभ ग्रीवासन को करने से हमें जो लाभ प्राप्त होते हैं वो इस प्रकार से हैं :- जब हम इस आसन को करते हैं तब हमारी गर्दन का सारा तनाव दूर हो जाता है। इसको करने से गर्दन की मांसपेशियों में अकड़न कम हो जाती है। इसको करने से सिर का भारीपन दूर हो जाता है।

Method of Greevaasan.
ग्रीवासन में श्वासक्रम/समय- (Breath/time in Greevaasan) 

कमर के ऊपरी भाग को उठाते समय अन्तः कुंभक करें। अंतिम अवस्था मे श्वास-प्रश्वास धीमी गति से करें एवं मूल अवस्था मे आते समय धीरे-धीरे श्वास छोड़े। अंतिम अवस्था में अधिकतम 5 से 10 सेंकड रुकें। फिर एक से दो बार करें।

 

ग्रीवासन करने से लाभ- (Benefit from Greevaasan)

  • मेरुदंड ओर गर्दन में लोच-लचक पैदा कर उन्हें मज़बूती प्रदान करता हैं एवं उनके विकारों को शरीर से दूर करने में सहयोगी हैं।
  • पाचन तंत्र को प्रभावशाली बनाता हैं।
  • स्त्री रोगों में लाभ प्रदान करता है।
  • पेट से संबंधित समस्याओं में भी लाभ मिलता है।
  • सांसो से संबंधित रोगों में भी लाभ मिलता है।
  • इस आसन से फेफड़ों को बल मिलता है।
  • इसके अभ्यास से शरीर में ऊर्जा की वृद्धि होती है।
  • इस आसन से गर्दन का तनाव ठीक होता है।
  • शरीर की मांसपेशियों के अकड़न को दूर करता है।
  • ये आसन सर के भारीपन को भी दूर करता है।
  • इस आसन से स्त्री रोगों में आराम मिलता है।

 

ग्रीवासन करते समय सावधानियाँ- (Precautions while Greevaasan) 

  1. स्पानीदलाइट्स, स्लीपडिस्क, सवाईकल की समस्या या हाई ब्लड प्रेशर, चक्कर आना, ह्दय विकार हो वे इस आसन को न करें।
  2. इस आसन के बाद पश्चिमोत्तानासन या आगे झुकने वाले कोई भी आसन अवश्य करें।
  3. पीठ और पेट से संबंधित रोग होने पर इस आसन को ना करे।
  4. शारीरिक कमजोरी होने पर भी इस आसन को नहीं करना चाहिए।
  5. धन की मांसपेशियों का कमजोर होने पर या सर्वाइकल होने की स्थिति में भी इस आसन को नहीं करना चाहिए।
  6. स्लीपडिस्क होने पर भी ना करे।
  7. गर्भवती महिलायों को भी नहीं करना चाहिए।

 

 

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