कपालभाति प्राणायाम कैसे करें?

कपालभाति प्राणायाम:

कपालभाति योग में षट्कर्म (हठ योग) की एक विधि (क्रिया) है। संस्कृत में कपाल का अर्थ होता है माथा या ललाट और भाति का अर्थ है तेज। कपालभाति प्राणायाम का नियमित अभ्यास करने से मुख पर आंतरिक प्रभा (चमक) से उत्पन्न तेज रहता है। कपाल भाति बहुत ऊर्जावान उच्च उदर श्वास व्यायाम है।

कपाल अर्थात मस्तिष्क और भाति यानी स्वच्छता। अर्थात ‘कपाल भाति’ वह प्राणायाम है, यही कपालभाति प्राणायाम: की परिभाषा है, एवं जिससे मस्तिष्क स्वच्छ होता है और इस स्थिति में मस्तिष्क की कार्यप्रणाली सुचारु रूप से संचालित होती है। वैसे इस प्राणायाम के अन्य लाभ भी है। लीवर किडनी गैस आदि के लिए कपालभाति प्राणायाम बहुत लाभकारी होता है।

(Kapaalabhaati Praanaayaam)

कपालभाति प्राणायाम कैसे करें? विधी-

कपालभाति प्राणायाम करने के लिए रीढ़ को सीधा रखते हुए किसी भी ध्यानात्मक आसन, सुखासन या फिर कुर्सी पर बैठें। इसके बाद तेजी से नाक के दोनों छिद्रों से साँस को यथासंभव बाहर फेंकें। साथ ही पेट को भी यथासंभव अंदर की ओर संकुचित करें। तत्पश्चात तुरन्त नाक के दोनों छिद्रों से साँस को अंदर खीचतें हैं और पेट को यथासम्भव बाहर आने देते है

इस क्रिया को शक्ति व आवश्यकतानुसार 50 बार से धीरे-धीरे बढ़ाते हुए 200 बार तक आप कर सकते हैे। किन्तु एक क्रम में 50 बार से अधिक न करें। क्रम धीरे-धीरे बढ़ाएं, अपनी आवश्यकता अनुसार।

कम से कम 7 मिनट एवं अधिकतम 25 मिनट तक।

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कपालभाति प्राणायाम के लाभ:
  1. इस प्राणायाम के नियमित अभ्यास से शरीर की अनावश्यक चर्बी घटती है।
  2. हाजमा ठीक रहता है।
  3. भविष्य में कफ से संबंधित रोग व साँस के रोग नहीं होते।
  4. प्राय: दिन भर सक्रियता बनी रहती है मन तंदरुस्त रहता है।
  5. रात को नींद भी अच्छी आती है।
  6. अस्थमा(दमा) का रोग जड़ से नष्ट हो जाते हैं।

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कपालभाति प्राणायाम करते समय यह सावधानियाँ रखें-
  • आप को यदि हृदय रोगों, हाई ब्लड प्रेशर और पेट में गैस आदि शिकायत हो तब यह कपालभाति प्राणायाम धीरे-धीरे करना चाहिये। (50 बार एक मिनट में लगभग)
  • धूल-धुआं-दुर्गन्ध, बन्द व गर्म वातावरण मेंकपालभाति प्राणायाम आप ना करें।
  • महिलाओं (यदि आप महिला हैं तब) के मासिक चक्र के समय और गर्भावस्था के दौरान कपालभाति प्राणायाम ना करें।
  • बुखार, दस्त, अत्यधिक कमजोरी की स्थिति में कपालभाति प्राणायाम ना करें।
  • कब्ज़ की स्थिति में कपालभाति प्राणायाम ना करें।
  • गुनगुने पानी में नींबू डालकर पेट साफ करें और फिर इसके बाद ही कपालभाति प्राणायाम आप करें।
  • बाहर की ओर निकले हुए पेट को शीघ्र घटाने के चक्कर में अनेक लोग दिन में कई बार कपालभाति प्राणायाम को करते हैं, जो की बिल्कुल भी सही नहीं हैं। यह आपके लिए हानिकारक हो सकता हैं।
  • आप खाना खाने के बाद 3 से 4 घंटे तक कपालभाति प्राणायाम ना करें।

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